मंजिल तुम्हें मुबारक...
जीना
मुझे रास्तों ने सिखाया है
जो छूट गए सफर
में फिर मिले नहीं
कभी
मिले
जो अजनबी, हमनवा हो गए है
दुनियां
ने ठिकाने लगा दिया था
मेरा
ठौर तो कायनात ने
बदला है
तुमने
तो दिल ही तोड़ा
है था बस
टुकड़ों
में धड़कना तो ठोकरों ने
सिखाया है
तुम्हारी
दुनियां से बेहतर है
नया
ठिकाना मेरा
एक रौशनी है सुकून की
हवा
है पानी है पहाड़
है
एक मकां है दिल
का बड़ा सा
नहीं
कुछ है तो बस
मैं हैं
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